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क्या आपने कभी सोचा है कि हम जो भी कर्म करते हैं, उनका फल हमें क्यों मिलता है? क्या हम अपनी गलतियों को सुधारकर अपने जीवन को बेहतर बना सकते हैं? आज हम एक ऐसी ही कहानी के बारे में बात करेंगे, जो हमें हमारे कर्मों के बारे में बहुत कुछ सिखाती है।
यह कहानी है बिन्दुम की, जो अपने बुरे कर्मों के कारण एक भयानक पिशाच बन गया था। उसकी पत्नी चुंचुला ने जब शिव पुराण की कथा सुनी तो उसका जीवन पूरी तरह बदल गया। वह अपने पति को बचाने के लिए देवी पार्वती के पास गई और उनसे अपने पति को मोक्ष दिलाने की प्रार्थना की।
पार्वती देवी ने चुंचुला से कहा, “तुम्हारे पति को शिव पुराण की कथा से ही मुक्ति मिल सकती है।”
चुंचुला ने गांधर्वराज तुमबुरु को बुलाया और उनसे अपने पति को शिव पुराण की कथा सुनाने की विनती की। तुमबुरु ने बिन्दुम को शिव पुराण की कथा सुनानी शुरू की। बिन्दुम, जो दर्द से चिल्ला रहा था, कथा सुनकर शांत हो गया। उसके सारे पाप धुल गए। उसका भयानक पिशाच का शरीर एक दिव्य शरीर में बदल गया।
यह कहानी हमें सिखाती है कि हमारे कर्म ही हमारे भविष्य का निर्माण करते हैं। अगर हम सही रास्ते पर चलें तो हमें किसी भी चीज़ से डरने की ज़रूरत नहीं है।
“गलत संगत इंसान का बुद्धि, चरित्र और भविष्य — तीनों छीन लेती है। – शिव पुराण
